भावार्थ:
स्तम्भवृति यज्ञ : – नियमित आहार करते हुए प्राण और अपान को अपने-अपने स्थानों पर रोक देना।
भगवान श्रीकृष्ण कहते है कि, इस प्रकार जो साधक यज्ञों को जानता है और उनकी साधना करता है, वह सभी प्रकार के कार्यों को करता हुआ भी पाप को प्राप्त नहीं होता।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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