भावार्थ:
भगवान श्रीकृष्ण को, अर्जुन के भाव को देख कर यह लगता है की, अर्जुन का जो अपने सम्बन्धियों के प्रति मोह है वह टूट नहीं रहा। इसलिये वह तत्वज्ञान के द्वारा ब्रहा की अनुभूति लेने की प्रेणना देते है। श्रीकृष्ण कहते है कि ब्रहा का अनुभव होने पर तेरा मोह टूटेगा और तुम्हे सम्पूर्ण प्राणियों में एवम अपने में परमात्मतत्व ब्रहा का ही अनुभव होगा और उसके सिवाय कुछ भी शेष अनुभव नहीं होगा।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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