भावार्थ:
कामना के आश्रित सात्त्विक प्रधान मनुष्य देवताओं का पूजन करते हैं। देवी सम्पदा को प्राप्त के लिये देव पद आया है। परन्तु देवताओं का पूजन करने वाले मनुष्य में जब राजस अथवा तामस प्रधानता बढ़ती है तब उनकी श्रद्धा भी बदल जाती है।
कामना आश्रित, राजस मनुष्य यक्षों और राक्षसोंका पूजन करते हैं। यक्षोंमें धनके संग्रहकी मुख्यता होती है और राक्षसोंमें दूसरोंका नाश करनेकी मुख्यता होती है। दोनों (यक्ष -राक्षस) ही आसुरी सम्पति को प्राप्त है।
कामना आश्रित, तामस मनुष्य प्रेतों तथा भूतोंका पूजन करते हैं। जो मर गये हैं, उन्हें प्रेत कहते हैं और जो भूतयोनिमें चले गये हैं, उन्हें भूत कहते हैं। यह आसुरी सम्पति वाले अधम को प्राप्त है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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