भावार्थ:
अध्याय १७ श्लोक ४ में भगवान श्री कृष्ण ने तीनो गुणों के प्रभाव में मनुष्य किस प्रकार के देवता का पूजन करता है इसका वर्णन किया है। अब इस श्लोक में गुणों का प्रभाव मनुष्य पर आहार, यज्ञ, दान और तप को लेकर किस प्रकार का होता है, इस का वर्णन है।
यज्ञ पद का अर्थ केवल अग्नि होत्र हवन, पूजन से नहीं है। अपितु यज्ञ पद में मनुष्य के सभी कार्य आ जाते है जो वह जीवन काल में करता है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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