भावार्थ:
यहां श्रद्धा पद परमात्मतत्व के लिये आया है। श्रद्धा से युक्त साधक सभी कार्यों का कारण परमात्मतत्व है, ऐसा जानता है। जो साधक प्रकृति पदार्थ की कामना तो करता ही नहीं, परमात्मा को प्राप्त करने की कामना भी नहीं करता और शरीर, वाणी और मन से तप करता है, उसको सात्त्विक कहते हैं।
इस प्रकार का तप प्रक्रिया योग है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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