भावार्थ:
इस श्लोक में और अगले श्लोक में योग स्थित भक्त के जितने भी गुण बताये है वह सब व्यवहार काल के है। इस से यह स्पष्ट होता है की योग की सिद्धि संसार में रहते हुये, समाज के सेवा करते हुये ही प्राप्त होती है। किसी कर्म सन्यास से नहीं।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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