भावार्थ:
सर्वश्रेष्ठ योगी के क्या गुण होते है, इसका वर्णन अध्याय ६ श्लोक ४७ में हुआ है।
परन्तु पूर्व श्लोक में अर्जुन प्रश्न करते है कि साधक योग युक्त किस प्रकार का साधक होता है – वह जो सकार रूप की उपासना करता है या वह जो अव्यक्त परमात्मतत्व की उपासना करता है।
इसके उत्तर में भगवान श्रीकृष्ण, योग से युक्त कौन है, इसका वर्णन पुनः इस श्लोक में करते है। योग युक्त साधक किस प्रकार की साधना करने से परमात्मा को प्राप्त होते है, इसका वर्णन अगले दो श्लोक में करते है।
सर्वश्रेष्ठ योगी कौन हैं?
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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