भावार्थ:
सूर्य का दृष्टान्त देते हुए भगवान श्री कृष्ण कहते है कि जिस प्रकार सूर्य ही सम्पूर्ण संसार को प्रकाशित करता है। अर्थात सूर्य के प्रकाश के अन्तर्गत ही संसार की सब क्रियाएँ होती है, परन्तु सूर्य को कर्तृत्व भाव नहीं होता। उसी प्रकार क्षेत्रज्ञ (पुरुष, आत्मा) के प्रकाश में ही क्षेत्र के सब कार्य होते है, परन्तु क्षेत्रज्ञ को कर्तृत्व भाव नहीं होता।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More