भावार्थ:
मनुष्य मन का आश्रय लेकर ही इन्द्रियों के द्वारा विषयों का सेवन करता है। मनुष्य पूर्व इंगित संस्कार के द्वारा इन्द्रियों के विषयों में राग-द्वेष करता है। यह राग-द्वेष ही विषयों का सेवन है।
विषय सेवन करने से परिणाममें विषयों में राग-आसक्ति बढ़ती है, जो सम्पूर्ण दुःखों का कारण है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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