भावार्थ:
जिस प्रकार मनुष्य एवं अन्य प्राणीओं में होने वाली क्रियाओं का कारण उनकी मूल प्रकृति-गुण है, जो परमात्मतत्त्व से प्राप्त है। उसी प्रकार सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि का जो तेज है, वह भी सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि की प्रकृति से प्राप्त है और उस प्रकृति का कारण परमात्मतत्त्व है।
जिस प्रकार मनुष्य शरीर और संसार में होने वाली क्रियाओं में सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि के तेज-प्रकाश का बहुत बड़ा योगदान है, और मनुष्य की अहंता का कोई योगदान नहीं है। उसी प्रकार मनुष्य शरीर में होने वाली क्रियाओं का कर्त्ता मनुष्य स्वयं को क्यों मानता है!
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More