भावार्थ:
पूर्व श्लोक में कहे गये भावों से युक्त साधक जब नित्य निरन्तर प्रेम पूर्वक मनुष्य धर्म का पालन करता है, तब उसकी बुद्धि योग में स्थिर हो जाती है और उसको समता की प्राप्ति होती है। समता की प्राप्ति ही परमात्मा को प्राप्त करना है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More