भावार्थ:
यह सभी विभूतियाँ योग में स्थित रहने के कारण, मेरे (कृष्ण रूप) समान ही सभी सामर्थ्य से युक्त थे, और ईश्वरीय सामर्थ्य से युक्त हो कर उन्होंने मनुष्य धर्म का पालन किया।
मरीचि, अङ्गिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वसिष्ठ – ये सात ऋषि कहे गये है।
सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार- ये चार मानस पुत्र नामसे प्रसिद्ध हैं।
स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, सावर्णि, दक्षसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, धर्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, देवसावर्णि और इन्द्रसावर्णि नामवाले चौदह मनु हैं।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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