भावार्थ:
अध्याय १३ में ज्ञान-विज्ञानं का जो वर्णन हुआ, वह पूर्ण न होने के कारण भगवान श्री कृष्ण ज्ञान के विषय आगे कहने का प्रण लेते है। साथ ही कहते है कि इस ज्ञान को प्राप्त करने पर साधक उस परम् सिद्धि को प्राप्त होता है जिसको प्राप्त करने से वह संसार के बंधनों से मुक्त हो जाता है।
जिस साधक का मन शान्त है उसको मुनि कहा गया है।
प्रोत्साहन देने के लिये भगवान श्री कृष्ण मुनि का उदहरण देते है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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