भावार्थ:
मनुष्य का स्वयं के शरीर के प्रति जो मोह, ममता, आसक्ति है, तमोगुण उसका प्रकाशक है। तमोगुण के कारण ही मनुष्य शरीर को कष्ट और पीड़ा से बचाकर रखना चाहता है। आलस्य और निंद्रा का कारण तमोगुण है। शरीर (शरीर, मन और बुद्धि) के प्रति आसक्ति, आलस्य और निंद्रा से मोहित हुआ मनुष्य का विवेक ढक जाता है।
तमोगुण मनुष्य को शरीर से बाँधता है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More