भावार्थ:
परमात्मा का चिन्तन करने के लिये स्थान किस प्रकार का हो, जिससे चिन्तन करने में सहयोग मिले, इसका वर्णन इस श्लोक में किया है।
यहा शुद्ध भूमि का अर्थ स्वच्छ भूमि से है। वह भूमि जहाँ सर्प, बिच्छु, एवं अन्य प्रकार के जन्तु न हो।
आसान भूमि से ऊँचा हो, जिससे भूमिपर घूमने वाले चींटी आदि जन्तु शरीर पर न चढ़ जाय। परन्तु इतना भी ऊँचा न हो की आसान अस्थिर हो जाय और साधक का गिरने का भय हो। यहाँ भी का कारण शरीर को कष्ट होने से नहीं है, अपितु ध्यानमें विक्षेप होने से है।
आसान स्थिर हो, हिलने वाला न हो।
आसान पर वह बिछाले जो प्राप्त हो और जो यथा परिस्थिति हो। मृगछाला अपने-आप मरे हुए की हो, न की उसको मार कर बनाई जाय।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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