भावार्थ:
योग में स्थित योगी का चित उसी प्रकार स्थिर (शान्त) होता है, जिस प्रकर दीपक की ज्योति स्पन्दन रहित वायुके के सम्पर्क में स्थिर होती है। इस श्लोक में उपमा दीपक की ज्योति की स्थिरता को लेकर के है।
जिस प्रकार दीपक प्रकाश मान होता है उसी प्रकार स्थिर चित प्रकाशमान हो जाता है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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