भावार्थ:
मनुष्य को पृथ्वी पर (मनुष्य लोक) जन्म लेने पर भी अन्य लोकों में जन्म लेनी की इच्छा होती है। जो की व्यर्थ है – कारण की कि जिस उदेश्य से मनुष्य पृथ्वी पर जन्म लेता है वह उदेश्य पूर्ण करने के लिये प्रयत्न नहीं करता और अन्य लोक में जाने की इच्छा करता है।
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते है कि मनुष्य किसी भी लोक में चला जाय उसको पुनः मृत्यु लोक में जन्म लेना ही पड़ता है, परन्तु समता में स्थित होने पर पुनर्जन्म नहीं होता।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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