भावार्थ:
प्राणी का जो जीवन काल है, उसके पूर्ण होने पर पांच तत्वों से बना शरीर पांच तत्वों में परिवर्तित हो जाता है और प्राणी का जो चेतनतत्त्व है वह परमात्मतत्व में विलीन हो जाता है। परमात्मतत्व की जो मूल प्रकृति है, पुनः उसका बीज रूप से गर्भ में स्थापना होती है, जिससे प्राणी की उत्पत्ति होती है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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