भावार्थ:
धर्म पूर्ण कार्य करने से दुराचारी शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है। अब उसके सब कार्य अन्यों के कल्याण के लिये होते है, इसलिये उसको शाश्वत शान्ति (समता) की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीकृष्ण पुनः विश्वास दिलाते है कि जो मनुष्य योग आरूढ़ होता है उसका पतन नहीं होता, उसका कल्याण निश्चित है।
यहाँ भक्ति का अर्थ योग आरूढ़ होना है, पूजा, जप तप नहीं है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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