भावार्थ:
भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते है कि यह अत्याधिक विचित्र बात है की परमात्मतत्व सम्पूर्ण सृष्टि को धारण करता है, उसी से सम्पूर्ण पदार्थ-प्राणियों की उत्त्पति होती है, भरण-पोषण होता है और विनाश होता है। फिर भी परमात्मतत्व में किसी प्रकार की क्रिया नहीं, विकार नहीं है। यह एक विशिष्ट प्रकार की शक्ति है, ऊर्जा है जिस से यह सृष्टि स्वतः ही क्रियाशील जान पड़ती है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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