भावार्थ:
जब वर्तमानमें पाप करनेवाला दुराचारी भी योग आरूढ़ होने पर कल्याण को प्राप्त होते है। तो फिर ब्रहा में रमण करने वाले अथवा पवित्र क्षत्रिय धर्म का पालन करने वाला योग आरूढ़ होगा तो वह परमगतिको प्राप्त न हो, ऐसा प्र्शन तो होता ही नहीं।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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