भावार्थ:
पूर्व दो श्लोक में कहीं गयी बात को समान्य रूप से दोहराते हुऐ पुनः स्पष्ट करते है की दुराचार का- पाप का कारण कोई भी रहा हो, मनुष्य जब भी योग आरूढ़ होता है, समता प्राप्ति के लिये निश्चित बुद्धि करता है और साधना करता है तो उसका कल्याण निश्चित है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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