भावार्थ:
आसुरी प्रकृति वाले मनुष्य को अहंकार होता है कि मैं सबका स्वामी हूँ। मैं बड़ा बलवान हूँ, सिद्ध हूँ। सभी कार्य मेरे इच्छा से होते है। जो कोई भी मेरी इच्छा के विपरीत जायेगा वह मेरा शत्रु है और मेरे द्वारा मृत्यु को प्राप्त होगा।
भोग के लिये मेरे पास पर्याप्त सामग्री है और मैं सुखी हूँ।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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