भावार्थ:
पूर्व श्लोक में जिनको नरकका द्वार बताया गया, उन्हीं काम, क्रोध और लोभ को यहाँ तमोद्वार कहा गया है। तम् नाम अन्धकारका है, जो अज्ञानसे उत्पन्न होता है।
जो साधक अपने कल्याण के लिये, अज्ञान से प्राप्त हुआ अन्धकार (काम, क्रोध और लोभ) का त्याग करने के लिये योग साधना करता है वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है।
परमगति है परमात्मा की प्राप्ति।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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