भावार्थ:
सर्व प्रथम आसुरी प्रकृतिवाले मनुष्य में विवेक की लुप्ता होती है। मनुष्य का कल्याण में है, यह ज्ञान नहीं होता। इसलिए स्वयं के कल्याण के लिये क्या करना है अथवा क्या नहीं, इसका विवेक नहीं होता। वह केवल भोग में लिप्त रहता है।
विवेक न होने के कारण विचारों में और स्वभाव में शुद्धता होती है, न ही आचरण सदाचार होता है और न ही वह सत्य का पालन वचनों में और कार्यों में करते है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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