भावार्थ:
ज्ञानी महापुरुष जिस तत्व (परमात्मतत्व) को सृष्टि के होने और क्रिया रूप होने का कारण मानते है, आसुर स्वभाववाले पुरुष इस ज्ञान को मिथ्या मानते है।
उनका अज्ञान यह कहता है की जगत की रचना में स्त्री-पुरुष की काम वासना कारण है। उन दोनोंके परस्पर संयोगसे यह संसार उत्पन्न हुआ है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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