भावार्थ:
जिस शास्त्रमें गुणोंके सम्बन्धसे प्रत्येक पदार्थके भिन्नभिन्न भेदोंकी गणना की गयी है, उसी शास्त्रके अनुसार मैं तुम्हें ज्ञान, कर्म तथा कर्ताके भेद बता रहा हूँ।
अध्याय १८ श्लोक १८ में जिस ज्ञान, कर्म तथा कर्ता का उल्लेख हुआ है, उन्ही में भेंद बताने की बात इस श्लोक में हुई है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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