भावार्थ:
भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच में जो संवाद धर्ममय है। कारण है कि इस संवाद में इन-इन विषयों पर चर्चा हुई:
इस प्रकार धर्म को जान कर जब धर्म का पालन किया जाता है, तब वह यज्ञ कहलाता है।
साथ ही यह संवाद ज्ञानयज्ञ स्वरूप है। इस का कारण है की, इस संवाद में परमात्मतत्व ज्ञान की चर्चा भी हुई, जिस को जान कर मनुष्य के कार्य अहंता रहित हो जाते है।
अध्याय ४ श्लोक २४ से अध्याय ४ श्लोक ३३ तक में अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन हुआ है। उन सभी यज्ञों में ज्ञानयज्ञ श्रेष्ठ है, इसका वर्णन अध्याय ४ श्लोक ३३ में हुआ है। तत्व ज्ञान को प्राप्त करने पर मनुष्य के सभी कार्य पाप रहित हो जाते है और मोक्ष को प्राप्त होता है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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