भावार्थ:
अध्याय २ श्लोक ११ से भगवान् श्रीकृष्ण ने जो ज्ञान देना आरम्भ किया था, उसका वह इस श्लोक में समापन करते हैं। वह कहते है कि यह अत्यधिक गूढ़ ज्ञान मेने तुम्हें पूर्ण रूप से दिया है। अब तुम इस पर विचार करो और जेसा चाहो वैसा करो।
इस गूढ़ ज्ञान के कुछ मुख्य बिन्दु इस प्रकार है:
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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