भावार्थ:
अगले तीन श्लोक में अब भगवान श्रीकृष्ण सुख के तीन भेद बताते है।
साथ ही भगवान श्रीकृष्ण उस सुख के विषय में भी बताने का वचन देते है जिसको अभ्यास के द्वारा प्राप्त किया जाता है और जिस को प्राप्त करने के बाद दुःखों का अन्त हो जाता है। वह सुख योग साधना से प्राप्त होने वाला सुख, है।
अभ्यास से ज्यों-ज्यों सुख में रुचि, प्रियता बढ़ती जाती है, त्यों-त्यों परिणाममें दुःखोंका नाश होता जाता है और प्रसन्नता, सुख तथा आनन्द बढ़ते जाते हैं
अर्जुन संन्यास और त्यागके तत्त्वको जानना चाहते है अतः उनकी जिज्ञासा के उत्तर में भगवान्ने त्याग, ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि और धृति के तीन-तीन भेद बताये। परन्तु इन सबमें ध्येय तो सुखका ही होता है। अतः भगवान् कहते हैं कि तुम उसी ध्येयकी सिद्धिके लिये सुखके भेद सुनो।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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