भावार्थ:
जो मनुष्य साहसी, निर्भीक होते है और अधिक बाहुबल से सम्पन्न होते है, वह क्षत्रिये वर्ण में आते है। समाज एवं राज्य की सुरक्षा करने में उनकी स्वतः ही रूचि है। जिस मनुष्य में क्षत्रिये गुण के साथ ब्राह्मण वर्ण के भी गुण होते है वह शासक बनते है। आज के आधुनिक शासन व्यवस्था में, बाहुबल की आव्यशकता न होने के कारण ब्राह्मण वर्ण भी शाशक होते है।
ध्यान रहे कि यह वर्ण मनुष्य के गुण है, न की कोई जाती अथवा समाजिक व्यवस्था।
मनुष्य अपनी गुणों के आधार पर समाजिक व्यवस्था में अपना योगदान देता है, न कि समाजिक व्यवस्था से गुण निर्धारित होते है। उसी प्रकार गुणों के आधार पर वर्ण कहे गये है न की जन्म के आधार पर वर्ण। जो समाज समाजिक व्यवस्था अथवा जन्म के आधार पर वर्ण निर्धारित करता है वे अज्ञानी है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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