भावार्थ:
जो मनुष्य वर्ण, आश्रम, परिस्थिति एवं शास्त्रों के अनुसार प्राप्त कार्य करता है, वह नियति से प्राप्त कार्य है। जो कार्य मनुष्य के लिये वर्ण, आश्रम, परिस्थिति एवं शास्त्रों के अनुसार निषिद्ध है वह भी नियतम् पद में आता है।
शरीर एवं कार्य से सम्बन्ध (कर्त्ता अहंकार) से रहित, कार्य में राग-द्वेष से रहित, फल की इच्छा से रहित प्राप्त कर्तव्यों को करता है उस कार्य को सात्त्विक कार्य कहा जाता है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More