भावार्थ:
अज्ञान रूपी अन्धकार से आवृत हुई बुद्धि जो शास्त्र विहित, धर्मकूल, सत्य से विपरीत ही जानता है, वह तामसिक बुद्धि है। वस्तुत तामसी बुद्धि कोई बुद्धि ही नहीं कही जा सकती। विपरीत निष्कर्षों पर पहुँचने की इसकी क्षमता अद्भुत होती है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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