भावार्थ:
संसार के आश्रय का त्याग करने वाला भक्त (योग युक्त साधक) संसार के सभी कार्यों को करता है। क्योकि वे कार्य
इसलिए उसके फल भी कल्याण रूपी, शाश्वत और अविनाशी होते है। अर्थात साधक परमात्मा को प्राप्त होता है।
इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण १७ अध्याय में सनातन धर्म रूपी ज्ञान का वर्णन करते हुये अपनी बात को पूर्ण करते है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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