भावार्थ:
जो मनुष्य अहंता रहित हो कर मनुष्य धर्म का पालन करेगा, समाज कल्याण के लिये कार्य करेगा, वह मेरे लिये अत्यन्त प्रिय कार्य करनेवाला होगा। और इसलिये पुरे भूमण्डल पर उसके समान मेरा दूसरा कोई प्रियतर भी नहीं होगा।
अतः श्रेष्ठ पुरुष वही है जो:
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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