सञ्जय उवाच
श्लोक के सन्दर्भ मे:
अध्याय २ श्लोक ९ – संजय कहते है:
अध्याय २ श्लोक ७ में अर्जुन, भगवान श्रीकृष्ण को गुरु मान कर उनसे पथ प्रदर्शन करने की प्राथना करते है।
परन्तु अध्याय २ श्लोक ८ में अर्जुन, एक प्रकार से स्पष्ट शब्दों में कह देते है कि हे श्रीकृष्ण, आप कुछ भी कहे, पर मेरा शोक दूर नहीं होने वाला।
और अंत में इस श्लोक में कह देते है कि मैं युद्ध नहीं करूँगा।
अर्जुन मानो यह कह रहे है कि आपको जो कहना है कहिये, मैं सुने को त्यार हूँ, परन्तु मेरा निर्णेय अटल है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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