भावार्थ:
देखने, सुनने और समझने में आने वाले जितने भी प्राणी (शरीर आदि) हैं, वे सब-के-सब जन्मसे पहले अव्यक्त थे अर्थात् उनका अस्तित्व नहीं था। मरने के बाद भी अव्यक्त हो जायँगे, अर्थात् नाश होने पर इन का अस्तित्व नहीं रहेगा।
जन्म होने पर, मरण से पहले जो बीच का समय है, उसमे ही यह शरीर व्यक्त हैं, अर्थात् इसका अस्तित्व है। परन्तु शरीर के अस्तित्व में होने के अन्तराल में भी इस में निरन्तर परिवर्तन हो रहा है। मनुष्य बालक से युवा, युवा से व्रद्ध होता है, घटता है, बढ़ता है। अतः इस प्रकार परिवर्तन होने वाली और आने-जाने वाली विषय पर शोक का कोई कारण नहीं है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
Read More