श्रीमद भगवद गीता : २३

अध्याय २ श्लोक २३

 

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।२-२३।।

 

शस्त्र इस (आत्मा) को काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गिला नहीं कर सकती और वायु (इसको) सूखा नहीं सकती। ||२-२३||

 

भावार्थ:

अध्याय २ श्लोक २३ – भगवान् श्रीकृष्ण कहते है:

अध्याय २ श्लोक २१ में परमात्मतत्व को अविनाशी, नित्य, अज और अव्यय कहा है, और उसका नाश नहीं किया जा सकता है, ऐसा कहा है। नाश क्यों नहीं किया जा सकता है, इसका स्पष्टा से इस श्लोक में वर्णन किया है।

संसार के प्राणी-पदार्थ को नष्ट करने के लिये उसको शस्त्र से काटा जा सकता है, अग्नि में जलाया जा सकता है, जल से गिला किया जा सकता है अथवा वायु से सुखाया जा सकता है। परन्तु परमात्मतत्व से साथ यह सब, कुछ भी किया नहीं जा सकता है।

इस का कारण अगले श्लोक में प्रस्तुत किया गया है।

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