भावार्थ:
अध्याय २ श्लोक २३ – भगवान् श्रीकृष्ण कहते है:
अध्याय २ श्लोक २१ में परमात्मतत्व को अविनाशी, नित्य, अज और अव्यय कहा है, और उसका नाश नहीं किया जा सकता है, ऐसा कहा है। नाश क्यों नहीं किया जा सकता है, इसका स्पष्टा से इस श्लोक में वर्णन किया है।
संसार के प्राणी-पदार्थ को नष्ट करने के लिये उसको शस्त्र से काटा जा सकता है, अग्नि में जलाया जा सकता है, जल से गिला किया जा सकता है अथवा वायु से सुखाया जा सकता है। परन्तु परमात्मतत्व से साथ यह सब, कुछ भी किया नहीं जा सकता है।
इस का कारण अगले श्लोक में प्रस्तुत किया गया है।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ है। यह चार पुरुषार्थ को करना ही मनुष्य जीवन का उदेश्य है। उद्देश्य इसलिये है क्योंकि इन चार पुरुषार्थ को करने से ही मनुष्य का कल्याण है। धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष, का अर्थ क्या है? यह पुरुषार्थ करने से मनुष्य का कल्याण किस प्रकार है? धर्म धर्म का अर्थ है कर्तव्य। श्रीमद […]
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